नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम 1989 संशोधन प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को अपनी मंजूरी दे दी है। इसी के साथ केंद्रशासित प्रदेश में जिला विकास परिषद ( DDC ) के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के साथ डीडीसी चुनाव की घोषणा भी जल्द ही होने की संभावना है।
पंचायती राज व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
मोदी कैबिनेट के इस फैसले को जम्मू-कश्मीर ( Jammu-kashmir ) के एलजी मनोज सिन्हा ( LG Manoj Sinha ) ने ऐतिहासिक करार दिया है। एलजी ने जम्मू-कश्मीर के लिए गुरुवार को ऐतिहासिक दिन बताते हुए पीएम मोदी का आभार जताया है। एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि इससे जम्मू कश्मीर में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था को मजबूती मिलने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है।
इस फैसले से जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूती मिलने के साथ विकास योजनाओं को जम्मू-कश्मीर में गति मिलेगी। इससे आम आदमी की राजनीतिक सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा।
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परिसीमन की प्रक्रिया जारी
डीडीसी के गठन के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन पहले ही जरूरी नियम अधिसूचित कर चुकी है। यूटी के सभी 20 जिलों में जिला परिषदों के गठन के लिए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया जारी है।
महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान
जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम संशोधन प्रस्ताव के मुताबिक स्थानीय स्तर पर जन सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए हर जिला विकास परिषद के 14 सदस्य सीधे चुने जाएंगे। लोगों द्वारा चयनित सदस्य अपने में से डीडीसी के प्रधान और उपप्रधान का चयन करेंगे। भविष्य में बीडीसी के चेयरपर्सन और विधायक भी इसके सदस्य होंगे। अब हर जिले में एडीसी प्रत्येक डीडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे। अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए सीटें आरक्षित होंगी। महिलाओं को भी 33 फीसद आरक्षण रहेगा।
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